प्रकृति हमें जो कुछ भी देती है वो बहुत सोच समझ कर देती है उसके पीछे कोई बड़ी वजह छुपी होती है जिसका अंदाजा हम नहीं लगा पाते कि जबतक प्रकृति न चाहें। आज हम ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बात करने वाले हैं जिन्हें प्रकृति के जन्म से गूंगा और बहरा बनाया लेकिन उनके हौसलो और जज्बे के आगे प्रकृति को भी झुकना पड़ा। free image एक पहलवान जिसके खुशी में पूरे स्टेडियम में बैठ दर्शक उसके लिए तालियाँ बजाते हैं और उसका नाम लेकर चिल्लाते हैं, लेकिन वो न तो ये सब सुन सकता है और न ही उसपे कोई प्रतिक्रिया कर सकता है। मिलिये वीरेंदर सिंह से जिन्हें लोग मूक पहलवान या 'गूंगा पहलवान' के नाम से जानते हैं। ये जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ थे। 34 वर्षीय Virender Singh (wrestler) को 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वीरेंदर सिंह भारत के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों में से एक हैं जिन्होंने पिछले बारह वर्षों में सात पदक जीते हैं, जिनमें से चार स्वर्ण पदक हैं। लोग उन्हें गूंगा पहलवान के उपनाम से जानते है ये उन्हें कमजोर नही बल्कि उन्हें और मजबूत बनाता है इन्होंने ज़िंदगी की हर चु...