प्रकृति हमें जो कुछ भी देती है वो बहुत सोच समझ कर देती है उसके पीछे कोई बड़ी वजह छुपी होती है जिसका अंदाजा हम नहीं लगा पाते कि जबतक प्रकृति न चाहें। आज हम ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बात करने वाले हैं जिन्हें प्रकृति के जन्म से गूंगा और बहरा बनाया लेकिन उनके हौसलो और जज्बे के आगे प्रकृति को भी झुकना पड़ा।
एक पहलवान जिसके खुशी में पूरे स्टेडियम में बैठ दर्शक उसके लिए तालियाँ बजाते हैं और उसका नाम लेकर चिल्लाते हैं, लेकिन वो न तो ये सब सुन सकता है और न ही उसपे कोई प्रतिक्रिया कर सकता है। मिलिये वीरेंदर सिंह से जिन्हें लोग मूक पहलवान या 'गूंगा पहलवान' के नाम से जानते हैं। ये जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ थे। 34 वर्षीय Virender Singh (wrestler) को 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
वीरेंदर सिंह भारत के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों में से एक हैं जिन्होंने पिछले बारह वर्षों में सात पदक जीते हैं, जिनमें से चार स्वर्ण पदक हैं। लोग उन्हें गूंगा पहलवान के उपनाम से जानते है ये उन्हें कमजोर नही बल्कि उन्हें और मजबूत बनाता है इन्होंने ज़िंदगी की हर चुनौती से लड़कर पूरे विश्व के कुश्ती चैंपियंस में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों से लिख दिया है।
वीरेंदर सिंह का जीवन परिचय (Virender Singh Biography in Hindi):-
पूरा नाम (Name): वीरेंदर सिंह
जन्म (Born): 1 अप्रैल 1986
जन्मस्थान (Birthplace): ससरोली, झज्जर, हरियाणा
निकनेम (Nickname): गूंगा पहलवान
माता (Mother): मन्ना देवी
पिता (Father): अजीत सिंह
पत्नी (Wife): अंजिल सिंह
वीरेंदर सिंह की जानकारी (Virender Singh Information in hindi):-
डेफलिंपिक्स गोल्ड मेडलिस्ट वीरेंदर सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1986 में हरियाणा के एक छोटे से गाँव ससरोली के किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता अजीत सिंह CISF अधिकारी थे और उनकी माता मन्ना देवी इस साधारण सी घरेलू महिला हैं।
वीरेंदर जन्म से न तो सुन सकते थे और न ही बोल सकते थे।
दिव्यांग होने की वजह से बचपन से ही लोग उनका मजाक उड़ाते थे। दूसरे पहलवान भी उनकी शारीरिक विकलांगता का मजाक उड़ाते थे। वे जब भी अखाड़े में वर्जिश करते थे तो लोग तंज कसा करते थे कि 'देख गूंगा भी पहलवान बनेगा।' वीरेंदर सिंह कुस्ती अपनी मर्जी से नहीं बल्कि मजबूरी में शुरु किया था।
वीरेंदर सिंह जब सिर्फ आठ साल के थे तो उनके पैर में चोट लग गया था तो उनके पिता अजीत सिंह उनका इलाज कराने दिल्ली ले गए थे। उसी समय अजीत का भी ऐक्सीडेंट हो गया और उन्हें भी कई महीनों तक बेडरेस्ट पर रहना पड़ा ऐसे में वो वीरेंदर का ख्याल नही रख सकते थे। अजीत ने उन्हें अपने भाई (वीरेंदर सिंह के चाचा) के पास ले गये। उनके चाचा सुरेंदर सिंह CISF में थे इन्हों विरेंदर को उनके इलाके के एक बाल व्यायामशाला अखाड़ा में डाल दिया और वो खुद भी उन्हें कुश्ती की पर्सनल कोचिंग देने लगें। ऐसे उनकी अखाड़े से पहली शुरुआत हुई।
"एक क्षण के लिए भी ये मत सोचो की तुम कमजोर हो,
हम सभी के भीतर आंतरिक शक्ति का भण्डार छिपा है."
वीरेंदर सिंह का करियर (Virender Singh Career in hindi):-
वीरेंदर सिंह ने 'नौशेरवां' खिताब जीता करे अपने करियर की पहली शुरुआत की थी और उन्हें 11 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी मिला था। उसके बाद उन्होंने 2002 में कैडेट नैशनल्स, हरिद्वार में 76 किलोग्राम वर्ग में जीत हासिल किया। उसके बाद उन्हें उनके पहले इंटरनैशनल कॉम्पीटिशन के लिए चुना गया। लेकिन उनकी जगह पर किसी दूर पहलवान को भेज दिया गया। इस घटना से आहत विरेंदर सिंह अपने पूरे दंगल में लौट गये।
साल 2005 में उन्होंने वह हासिल किया जो कोई अन्य बधिर पहलवान नहीं कर पाया था। वीरेंदर के पिता और चाचा को डेफलिंपिक्स (Deaflympics) के बारे में पता चला जो कि मेलबर्न में हो रहा था। वहां जाने में लिए वीरेंदर सिंह ने 70 हजार रुपये का खर्चा किया। उन्होंने वहां स्वर्ग पदक (Gold medal) जीता। हालांकि ये जीत उनको कोई पहचान नही दिला सकी और ना ही कोई आर्थिक लाभ मिला। वो दंगल और विश्व चैंपियनशिप के बीच संघर्ष करते रहे। उस समय उन्हें एकमात्र पहचान के रूप में साल 2016 में अर्जुन पुरस्कार मिलना था।
वीरेंदर सिंह के रिकॉर्ड्स (Virender Singh Records in hindi):-
वीरेंदर सिंह तीन बार के डेफलिंपिक्स गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। वह बोलने और सुनने में असमर्थ कम्युनिटी के पहले ऐथलीट हैं जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार उनकी प्रतिभा और मेहनत को पहचान दिलाता है। यह पुरस्कार उनके दिव्यांग समुदाय के लिए एक गर्व की बात है।
डेफलिंपिक्स (Deaflympics):-
2005
Gold (85kg) Melbourne, Australia
2009
Bronze (85kg) Taipei, Chinese Taipei
2013
Gold (74kg) Sofia, Bulgaria
2017
Gold (74kg) Samsun, Turkey
डेफ वर्ल्ड चैंपियनशिप्स (Deaf World Championships):-
2008
Silver (96kg) Yerevan, Armenia
2012
Bronze (84kg) Sofia, Bulgaria
2016
Gold (74kg) Tehran, Iran
वीरेंदर सिंह को मिले हुए अवार्ड्स (Virender Singh Awards in hindi):-
2008
राजीव गांधी खेल रत्न
2016
अर्जुन पुरस्कार
2018
राष्ट्रीय विकलांगता पुरस्कार
2021
पद्मश्री पुरस्कार
"वीरेंदर सिंह पद्मश्री पुरस्कार पाकर खुश हैं। इस पुरस्कार का इंतजार वो एक लंबे समय से कर रहे थे। ये पुरस्कार उन्हें आने वाले मुकाबलो के लिए तैयार करेगा। उनका सपना है कि वो आने वाले समय मे राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भी जीते।"
उनके जीवन पे फ़िल्म (Film on his Life):-
वीरेंदर सिंह का सफर बहुत संघर्षपूर्ण रहा है उनके इस संघर्ष को एक फ़िल्म के माध्यम से सबको दिखाया गया है। साल 2013 में बना स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म जिसका नाम 'गूंगा पहलवान' है ये फ़िल्म उनके जीवन के संघर्ष को बयां करता है। इस डॉक्युमेंट्री को कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिला है तथा इस फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया है।
"उस व्यक्ति के लिए जीत हमेशा संभव है जो हार मानने से इनकार करता है।"
- नेपोलियन हिल
इसी विचार के साथ हम आज खुद से वादा करेंगे कि हम अपने जीवन मे कभी भी अपने कमजोरियों को खुद पे हावी नही होने देंगें। वीरेंदर सिंह के जीवन से सीखते हुवे हम कभी हार नही मानेंगे।
"हमारे इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।"
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