WORLD AUTISM AWARENESS DAY 2023 : विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (World Autism Awareness Day in Hindi) पूरे दुनिया में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से पीड़ित लोगों के बारे में जागरूकता को बढ़ने के लिए इसे हर साल 2 अप्रैल को पूरे दुनिया में मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय दिवस होने की वजह से इसे संयुक्त राष्ट्र के सदस्य भी पूरे राष्ट्रों को ऑटिज्म से लड़ने तथा इसका निदान पाने के लिए सबको प्रोत्साहित करते है। इस दिन इस बीमारी से पीड़ित बच्चों और बड़ों के जीवन में सुधार के लिए कदम उठाया जाता हैं और उन्हें सार्थक जीवन बिताने में मदद की जाती है।
ऑटिज्म का प्रतीक (Autism Symbol in Hindi)
ऑटिज्म एक तरह की बीमारी होती है। नीला रंग ऑटिज्म का प्रतीक माना गया है। इसलिए हर साल इस दिन प्रमुख ऐतिहासिक इमारतों को नीले रंग के रोशनी से सजाया जाता है।
ऑटिज्म का इतिहास (History of Autism in Hindi)
विश्व ऑटिज्म दिवस को पहली बार 2008 में 2 अप्रैल को मनाया गया था और इसे 18 दिसंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया भी गया था।
ऑटिज्म दिवस मनाने का उद्देश्य (Aim to celebrate autism day in Hindi)
इस दिवस का उद्देश्य ये है कि ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे और बड़ों के जीवन में सुधार किया जा सकें तथा उन्हें अच्छा जीवन व्यतीत करने में मदद किया जा सकें। इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव अधिकार सुधार के लिए एक पूरक के रूप में अपनाया गया।
विश्व आटिज्म जागरूकता दिवस 2022 थीम (World Autism Awareness Day 2022 Theme)
इस साल विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस का विषय "समावेशी शिक्षा", "Inclusive Education" रखा गया है। वर्ष 2021 में वर्ल्ड ऑटिज़्म अवेयरनेस डे की थीम "कार्यस्थल में समावेश" रखा गया था।ऑटिज्म से पीड़ित (Suffering from Autism in Hindi)
ऑटिज्म पूरी दुनिया में फैला हुआ है, एक अध्ययन के मुताबिक भारत में हर 66 बच्चों में से एक बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है। एक दशक से भारत में ऑटिज्म से पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी हुई है, लेकिन उसके मुताबिक जागरुकता की बहुत ज्यादा कमी है। रिपोर्ट की माने तो साल 2010 तक विश्व में तकरीबन 7 करोड़ लोग ऑटिज्म से प्रभावित हुवे थे।
ऑटिज्म क्या है? (What is Autism in Hindi)
ऑटिज़्म, या ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD), सामाजिक कौशल, दोहराए जाने वाले व्यवहार, भाषण और अशाब्दिक संचार और विकास सम्बन्धी विकार है। इससे पीड़ित व्यक्ति को सामाजिक सहभागिता और संचार में परेशानी होती है। ऑटिज्म के लक्षण पहले तीन वर्षों के दौरान बच्चे के माता-पिता द्वारा देखे जाते हैं तथा ये संकेत धीरे-धीरे बढ़ता होता हैं।
• ऑटिज्म मस्तिष्क विकास में उत्पन्न बाधा से संबंधी विकार है।
• ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति सामान्य लोगो से अलग स्वयं में खोये रहते है।
• विकास संबंधी समस्याओं में ऑटिज्म तीसरे स्थान पर है।
• ऑटिज्म के रोगी को मिर्गी का दौड़ा भी पड़ सकता हैं।
• जिन बच्चों में यह रोग होता है उनका विकास अन्य बच्चों से असामान्य होता है।
ऑटिज्म के लक्षण (Symptoms of Autism in Hindi)
• इस बीमारी से प्रभावित बच्चे जल्दी से दूसरे लोगों से आई कॉन्टेक्ट नहीं कर पाते हैं।
• इस बीमारी से प्रभावित बच्चे किसी की आवाज सुनने के बाद भी वो कोई जवाब नहीं देते हैं।
• इस बीमारी से प्रभावित बच्चे भाषा को सीखने-समझने में दिक्कत आती है।
• इस बीमारी से प्रभावित बच्चे अपनी ही धुन में मग्न रहते हैं।
• इस बीमारी से प्रभावित बच्चे सामान्य बच्चों से अलग दिखते हैं।
ऑटिज्म से बचने के उपाय (Temple to avoid autism in Hindi)
• अगर इस बीमारी से अपने बच्चे को बचाना है, तो इसके लिए गर्भवती महिला को नियमित रूप से अपना मेडिकल चेकअप करवाते रहना चाहिए साथ ही साथ नियमित दवा लेनी चाहिए।
• किसी भी नशीले पदार्थ जैसे- धूम्रपान, शराब जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
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