Seasonal foods in Hindi 2023 : अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन बहुत आवश्यक है लेकिन आपके एक जैसे खाने की आदत आपको नुकसान पहुंचा सकता है। आयुर्वेद में स्वास्थ्य और भोजन को लेकर बहुत कुछ लिखा गया है कि किस मौसम या ऋतु में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। हर मौसम का अपना अलग स्वभाव होता है हमे उसके अनुसार खाना चाहिए।अगर हम मौसम के अनुकूल भोजन करते है तो हम अधिक स्वस्थ और प्रसन्न रहते है। ऐसे लोग कम बीमार भी पड़ते है। आयुर्वेद में स्वस्थ रहने के लिए अनेको प्रकार के नियम बताये गये है, अगर हम उन नियमों का पालन करें तो खुद हमेशा स्वस्थ रख सकते हैं।
हमारे आयुर्वेद में भोजन को लेकर बहुत कुछ बताया गया है कि किसी मौसम के अनुसार या किसी महीने के अनुसार हमे क्या खाना चाहिए और क्या नही खाना चाहिए। इसको वैज्ञानिकों ने भी माना है क्योंकि हर एक सप्ताह, तिथि या महीने में मौसम बदलता रहता है। अगर हम इस बदलाव को समझ ले और उस बदलाव के अनुरूप ही खाये तो ही हम स्वस्थ रह सकते हैं। जानिये आयुर्वेद के नियम किस मौसम में क्या खाना चाहिए और क्या नही खाना चाहिए हमारे इस ब्लॉग में-
आज हम कुछ पुरानी कहावतों का विश्लेषण अपने इस ब्लॉग में करेंगे की किस महीने में क्या खाना चाहिए, कब क्या नही खाना चाहिए और किस महीने में क्या नही खाना चाहिए:-
क्या खाये क्या न खाएं और क्या नही करना चाहिए उसपे कहावत:-
"चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल।
सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही।
अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना।
जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै।"
जनवरी-फरवरी के महीने में : इस महीने में मिश्री नहीं खानी चाहिए।
मार्च-अप्रैल के महीने में : इस महीने में गुड़ नहीं खानी चाहिए।
अप्रैल-मई के महीने में : इस महीने में तली-भुनी चीजों अथवा तेल का अधिक सेवन नही करना चाहिए।
मई-जून के महीने में : इन महीने में गर्मी अधिक रहती है तथा लू भी चलता है जिसकी वजह से बाहर अधिक घूमना-फिरना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
जून-जुलाई के महीने में : बारिश होने की वजह से कीड़ो मकोड़ों का प्रकोप रहता है जिसकी वजह से हरी सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए।
जुलाई-अगस्त के महीने में : इस महीने दूध व दूध से बनी चीजे अथवा हरी सब्जियां नही खानी चाहिए।
अगस्त-सितंबर के महीने में : इस महीने में छाछ, दही का सेवन नहीं करना चाहिए।
सितंबर-अक्टूबर के महीने में : इस महीने में करेला नही खाना चाहिए।
अक्टूबर-नवंबर के महीने में : इस महीने में दही से बनी चीजें अथवा दही के सेवन से बचने चाहिए।
नवंबर: दिसंबर के महीने में : इन महीनों में जीरे का उपयोग अपने खानो में नहीं करना चाहिए।
दिसंबर-जनवरी के महीने में : इस महीने में अधिक ठंडी रहती है इसी लिए धनिया नहीं खाना चाहिए क्योंकि धनिये की प्रवृति ठंडी होती है।
किस महीने में क्या खाना चाहिए और क्या करना चाहिए उसपे कहावत:-
"चैत चना, बैसाखे बेल, जैठे शयन, आषाढ़े खेल, सावन, हर्रे, भादो तिल।
कुवार मास गुड़ सेवै नित, कार्तिक मूल, अगहन तेल, पूस करे दूध से मेल।
माघ मास घी-खिचड़ी खाय, फागुन उठ नित प्रात नहाय।"
जनवरी-फरवरी के महीने में : इन महीनों में घी, खिचड़ी खानी चाहिए।
फरवरी-मार्च के महीने में : इस महीने में सुबह जल्दी नहाना चाहिए अथवा घी, खिचड़ी का सेवन करना चाहिए।
मार्च-अप्रैल के महीने में : इस महीने में चना खाना चाहिए।
अप्रैल-मई के महीने में : इस महीने में बेल का सेवन करना चाहिए।
मई-जून के महीने में : इस महीने में पर्याप्त सोना चाहिए अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
जून-जुलाई के महीने में : इस महीने में खुद को सक्रिय रखना चाहिए, व्यायाम करना चाहिए और खूब खेलना-कूदना भी चाहिए
जुलाई-अगस्त के महीने में : इस महीने में हरड़ (हर्रे) का सेवन करना चाहिए।
अगस्त-सितंबर के महीने में : इस महीने में तिल खाना चाहिए।
सितंबर-अक्टूबर के महीने में : इस महीने के गुड़ का सेवन फायदेमंद रहता है।
अक्टूबर-नवंबर के महीने में : मूली का सेवन करना चाहिए।
नवंबर-दिसंबर के महीने में : इस महीने में तेल अथवा तेल से बनी चीजो का सेवन कर सकते हैं।
दिसंबर-जनवरी के महीने में : इस महीने में सेब खाना चाहिए अथवा नियमित दूध पीना चाहिए।
मौसम या ऋतु का प्रभाव हमारे स्वाद पर :-
मौसम के बदलाव असर हमारे स्वाद पर कैसे पड़ता है आइये जानते है कि किस ऋतु में क्या खाएँ -● शीत ऋतु
शिशिर के मौसम में खाने के पदार्थों में कड़वेपन का स्वाद होता हैं।
● वसंत ऋतु
वसंत के मौसम में खाने के पदार्थों में कड़ा (कसैलापन) का स्वाद होता है।
● ग्रीष्म ऋतु
ग्रीष्म के मौसम में खाने के पदार्थों में तीखापन का स्वाद होता है।
● वर्षा ऋतु
वर्षात के मौसम में खाने के पदार्थों में खट्टापन का स्वाद होता है।
● शरद् ऋतु
शर्दियों के मौसम में खाने के पदार्थों में नमकीनपन का स्वाद होता है।
● हेमंत ऋतु
हेमंत के मौसम में खाने के पदार्थों में मीठापन का स्वाद होता है।
मौसम के अनुसार खान पान (Eat according to the Seasons) :-
शीत ऋतु के आहार विहार (Seasonal Foods in Winter Season)
(फरवरी-मार्च)
खाएँ
अदरख, लौकी, पत्तागोभी, भिंडी, कद्दू तथा टमाटर, नया चावल, नया ज्वार तथा गेहूँ, काला चना तथा मूंग, कंद, गाजर, अदरक, आलू, चिकन, मछली, मटन तथा झींगा, सेब, गरी, अंगूर, नारंगी तथा अनन्नास, मक्खन, पनीर, मट्ठा, क्रीम, घी तथा दूध, काजू, पिस्ता, तिल, चीनी तथा मिठाइयाँ, हलका गरम पानी पीना चाहिए तथा सेंधा नमक, मूँग की दाल की खिचड़ी, व गरम प्रकृति वाला भोजन अच्छा होता है।
न खाएँ
करेला, बैंगन, सूखी मेथी, सूरजमुखी, नया-पुराना जौ तथा पुरानी ज्वार, सेम, सूखी मूंग दाल तथा मटर, लहसुन, कमलगट्टा तथा मूली, केंकडा, तला व सूखा मांस, जामुन, जीरा, तला भोजन, सरसों तथा लाल मिर्च, ठंडा पानी नही पीना चाहिए। कड़वे, तीखा,, चटपटे तथा ठंडी प्रकृति के खाने से बचना चाहिए।
वसंत ऋतु के आहार विहार (Seasonal foods in Spring Season)
(मार्च से मई)
खाएँ
बैंगन, परवल, तोरई, अदरक, करेला, मेथी, बथुआ, चौलाई तथा पालक, जौ, ज्वार, पुराना चावल तथा गेहूँ, मसूर दाल, चना, हरे अनाज, हॉर्स ग्राम, येलो ग्राम, गाजर, लहसुन, प्याज, मूली तथा हल्दी, केंकड़ा, चिकन, मछली, तली मछली, कबाब, झींगा, कोला, संतरा, शहतूत, पपीता तथा पेठा, मट्ठा, धनिया के दाने, जीरा, हींग, शहद, आँवला, अजमोद तथा मिर्च। कफनाशक पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
न खाएँ
आलू, भिंडी, नए अनाज तथा नया चावल, काला चना, तूबा, कमल ककड़ी, खिचड़ी, साबूदाना, अरवी, बड़ी मछली, सेब, चुकंदर, काजू, ककड़ी, शरीफा, नारंगी, पिस्ता, अमरूद, आडू, स्ट्रॉबेरी तथा प्लेंटेन, क्रीम, पनीर, गाय का दूध तथा खोया, ठंडा पानी या ठंडे पदार्थ, मिठाइयोँ का सेवन हानिकारक होता है।,
ग्रीष्म ऋतु के आहार विहार (Seasonal foods in Summer Season)
(जून से जुलाई)
खाएँ
लौकी, फूलगोभी, भिंडी तथा परवल, पुराना गेहूँ, सत्तू, भात, खीर, दूध ठंडे पदार्थ, बथुआ, करेला, परवल, ककड़ी, तरबूज, आधा पका चावल, नया चावल तथा लाल चावल, काला तथा हरा चना, चुकंदर, आलू, साबूदाना तथा अरवी, चिकन मांस, सेब, केला, शरीफा, ककड़ी, सूखा नारियल (गिरी), मक्खन, क्रीम, दही, घी तथा दूध, गुलाब जल, कच्चे आम का पन्ना।
न खाएँ
बैंगन, करेला, मेथी, शिमला मिर्च, जौ तथा मक्का, फलियाँ सेम, हॉर्स ग्रेन, लहसुन, सूखा मटन, तला मटन तथा मछली, बर्फ का ठंडा पानी न पीयें। ऐसे मौसम में तिक्त, नमकीन, चटपटे, गरम व रूखे पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए।
वर्षा ऋतु के आहार विहार (Seasonal foods in Rainy Season)
(अगस्त से सिम्बर)
खाएँ
बैंगन, लौकी, भिंडी तथा परवल, पुराने चावल, पुराना गेहूँ, खीर, खिचड़ी, आधा उबला चावल, ज्वार, भुने अन्न तथा गेहूं, काला चना, मूंग, लहसुन, अदरक, प्याज तथा अरवी, चिकन तथा मटन, सूखा नारियल, अंगूर, नींबू तथा आम, दही, मट्ठा, घी तथा दूध, हींग, धनिया, जीरा, गुड़, मिर्च तथा सेंधा नमक, गरम पानी पीना चाहिए।
न खाएँ
करेला, बंदगोभी, सुखी सब्जियाँ तथा पालक, जौ, मक्का तथा बाजरा, सूखा चना तथा चना दाल, गाजर, अरवी, कमल ककड़ी, साबूदाना, आलू, सूखा मटन तथा मछली, ककड़ी, जामुन, खरबूज तथा तरबूज, भैंस का दूध, पनीर, जलेबी, मिठाई, तले भोजन, शरबत तथा स्क्वैश, ठंडा तथा बिना उबाला पानी नही पीना चाहिए। बरसात में पाचन क्रिया कमजोर रहता है इसीलिए हल्के पदार्थों वाला ,भोजन करना चाहिए।
शरद ऋतु के आहार विहार (Seasonal foods in Autumn Season)
(अक्टूबर से नवम्बर)
खाएँ
गुड़, मिश्री, चौलाई, लौकी, करेला, बंदगोभी, मेथी, भिंडी तथा पालक, चावल, लाल नमक, ज्वार तथा गेहूं, सेम, बाकला, मूंग तथा मटर, बीन्स, आलू, शकरकंद, साबूदाना, सिंघाड़ा तथा अरवी, चिकन तथा मटन, सेब, केला, अंजीर, नारियल, मुनक्का, आँवला, अंगूर, जामुन, अनार, चीकू, मक्खन, घी, खोया, आइसक्रीम तथा दूध, धनिया के दाने तथा पत्ते, शहद, पुराना घी, ठंडा पानी, मटके का पानी पीना चाहिए।
न खाएँ
आलू,मक्का, काला चना, हॉर्स ग्राम तथा राजमा, केकड़ा, बड़ी मछली, सूखी मछली तथा झींगा, चेरी, नींबू, आडू, अनन्नास, कच्चा आम, स्ट्रॉबेरी, मट्ठा, दही, मट्ठे की कढ़ी, हींग, मिर्च, चना मसाला, पुदीना, कालीमिर्च, अचार तथा सूरजमुखी का तेल, हलका गरम पानी तथा रात में रखा गया पानी नही पीना चाहिए।
हेमंत ऋतु के आहार विहार (Seasonal foods in Pre Winter Season)
(दिसम्बर से जनवरी)
खाएँ
आलू, बथुआ, लौकी, बंदगोभी, मेथी, भिंडी, कद्दू तथा पालक, चावल, तिल, मक्का तथा गेहूँ, चौलाई, काला चना तथा मूंग, चुकंदर, गाजर, अदरक, कमलगट्टा, प्याज, शकरकंद, चिकन, मछली, मटन तथा झींगा, सेब, केला, अनार,अंगूर, नारंगी, अनन्नास, मक्खन, मट्ठा, पनीर, दही, घी, खोवा तथा दूध, लौंग, पिस्ता, अखरोट, तिल, जलेबी, चीनी तथा मिठाइयाँ, हलका गरम पीना चाहिए।
न खाएँ
बैंगन, करेला, सूखी मेथी, जौ, पुराने अनाज तथा ज्वार, काला चना, हॉर्स ग्राम तथा राजमा, लहसुन, मूली तथा शलगम, सूखा मांस, तला मांस, छोटी मछलियाँ, जामुन, दालचीनी, जीरा, सरसों, पोस्तदाना, ठंडा पानी अथवा ठंडे पदार्थो का सेवन नही करना चाहिए।
"मौसम या ऋतु के अनुसार क्या खाना चाहिए और क्या नही खाना चाहिए अब आप लोगो को इसकी जानकारी हो गई है तो उन चीजों से बचे जो आपके स्वस्थ को खराब कर सकता है और उन बातों का भी ध्यान दे कि आपको क्या नही करना है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत अथवा जागरूक रहे।"
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"इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए धन्यवाद"
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